आँखों से हैं अंधे लेकिन मेहनत की हैं मिसाल, जानिए कैसे नगेंद्रन ने 7 बार में क्लियर किया UPSC

आँखों से हैं अंधे लेकिन मेहनत की हैं मिसाल, जानिए कैसे नगेंद्रन ने 7 बार में क्लियर किया UPSC

कहते हैं कि इंसान अगर मेहनत करें तो वह क्या नहीं कर सकता.  किसी भी व्यक्ति की मेहनत और शिद्दत उसे उसकी मंजिल तक पहुंचा ही देती है.  आए दिन हमें ऐसे कोई ना कोई मामले सुनने या देखने को मिलते हैं जहां किसी व्यक्ति को उसके कठिन परिश्रम के चलते आखिरकार उसकी मंजिल मिल ही जाती है.  वही आज के स्पेशल पोस्ट में हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं  जिसने यूपीएससी क्लियर करने की ऐसी ठानी की कोई भी रास्ते में आने वाली मुसीबतों से रोक नहीं पाई.  यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि चेन्नई के बाला नगेंद्रन है.  नगेंद्रन की एक खासियत यह भी है कि वह तमिलनाडु के रहने वाले हैं और कि 100 फीसदी नेत्रहीन हैं.  नगेंद्रन की सक्सेस के पीछे काफी संघर्ष जुड़ा हुआ है.  उनकी मेहनत और संघर्ष ने आज ने इतना कामयाब बना दिया कि वह एक प्रसिद्ध आईएएस अधिकारी बन चुके हैं.

पिता थे टैक्सी ड्राइवर

बाला नगेंद्रन के पिता पेशे से टैक्सी ड्राइवर थे जबकि उनकी मां हाउसवाइफ थी.  अपने स्कूली दिनों से ही नगेंद्रन पढ़ाई लिखाई में काफी अच्छे थे.  उन्हें पढ़ने के दौरान अपने एक शिक्षक से आईएएस बनने की प्रेरणा मिली थी.  द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए बाला ने बताया कि, ” जब भी कोई मुझे नेत्रहीन होने को चुनौती के रूप में बताता है तो मैं कभी भी इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता और ना ही कर सकूंगा.  व्यक्तिगत रूप से देखा जाए तो अंधापन भी एक शक्तिशाली हथियार है जो कि हमें लोगों को और भी बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है.  मेरी नेत्रहीनताने ही मुझे आंतरिक दृष्टि का एहसास करवाया है.”

4 साल तक हुए फेल

हम साधारण लोग अगर एक बार किसी चीज में हार प्राप्त कर लेते हैं तो दोबारा उस चीज की तरफ कभी प्रयास नहीं करना चाहते.  लेकिन नगेंद्रन ने कभी भी हार मानना नहीं सीखा. उन्होंने साल 2011 में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी.  हालांकि इसके लिए उन्हें कई तरह की कठिनाइयों से भी गुजरना पड़ा था.  वह आम लोगों की तरह पढ़ नहीं सकते थे इसलिए उन्हें हर किताब ब्रेल लिपि में खोजने पढ़ती थी जो कि सच में अपने आप में एक मुश्किल टास्क था.  शुरुआत के 4 साल तक में लगातार फेल हुए थे लेकिन फिर भी उन्होंने तैयारी करना नहीं छोड़ा.

ए ग्रेड सेवाओं की नौकरी ठुकराना

बता दें कि साल 2017 में यूपीएससी ग्रेड ए परीक्षा को बाला नगेंद्रन ने क्लियर कर लिया था और 927वी रैंक प्राप्त की थी.  इस बीच उन्हें ए ग्रेड सेवाओं के लिए चुना गया था परंतु उन्होंने ऐसी नौकरी को करने से मना कर दिया था क्योंकि उनका सपना तो हमेशा से आईएएस बनने का ही था.  आखिरकार उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन इस बार भी वह एक नंबर से पीछे रह गए.  मेहनत करते करते आखिरकार साल 2019 में बाला की मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपना सपना पूरा कर दिखाया.  7 बार फेल होने के बाद उन्होंने 2019 में 659वीं रैंक पाकर आईएएस अफसर बनना स्वीकार किया.  आज बाला नगेंद्रन कई लोगों के लिए एक मिसाल बन कर उभरे हैं.

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